नाम – श्याम प्रकाश
पद - विधायक
(भारतीय जनता पार्टी),गोपामऊ (हरदोई), उत्तर प्रदेश
नवप्रवर्तक कोड – 71187883

श्याम प्रकाश: गोपामऊ की राजनीति में
अनुभव, विवाद और जनसेवा की
कहानी
उत्तर प्रदेश की राजनीति विविधता, जातीय सामाजिक संरचना और विकास की चुनौतियों से भरी है। इसी राजनीति के परिदृश्य में श्याम प्रकाश एक प्रभावशाली और जुझारू नेता के रूप में उभरते हैं। वर्तमान में वे गोपामऊ विधानसभा क्षेत्र (हरदोई) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक हैं और लंबे समय से राजनीति में सक्रिय पद रखते आए हैं। उनका राजनीतिक सफर संघर्ष, संगठनिक अनुभव, जमीनी जनसमस्या समाधान और बेबाक बयानों से ओत-प्रोत रहा है।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक
पृष्ठभूमि
श्याम प्रकाश का जन्म 17 जनवरी 1961 को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में हुआ। वे एक हिंदू (पासी) दलित परिवार से आते हैं और उनके पिता का नाम स्वर्गीय झम्मन लाल था, जो एक मेहनती किसान थे। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े श्याम प्रकाश ने प्रारंभ से ही समाज और राजनीति के मुद्दों को करीब से अनुभव किया, जिससे उनकी सेवा-भावना, सामाजिक चेतना और नेतृत्व क्षमता विकसित हुई। उन्होंने अपनी शिक्षा गांधी फैज-ए-आम कॉलेज, शाहजहांपुर (रुहेलखंड विश्वविद्यालय) से पूर्ण की और वर्ष 1983 में स्नातक की डिग्री हासिल की। श्याम प्रकाश के पास कृषि और उद्योग (फैक्ट्री संचालन/व्यवसाय) का अनुभव भी रहा है, जिससे वे आम ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं और चुनौतियों को बेहतर समझते हैं। उन्होंने शशि वर्मा से विवाह किया और उनके तीन बच्चे—दो बेटे तथा एक बेटी हैं, जिनके साथ उनका पारिवारिक जीवन संतुलित और सामाजिक रूप से सक्रिय रहा है।

राजनीतिक सफर – संघर्ष से स्थापित
नेता तक
श्याम प्रकाश का राजनीतिक सफर साधारण से जटिल और प्रभावशाली रहा है।
उन्होंने पहली बार 1996 में तत्कालीन अहिरोरी विधानसभा सीट से बहुजन
समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत
हासिल की। यह उनकी राजनीतिक यात्रा का पहला बड़ा उपलब्धि-पूर्ण मोड़ था। इसके बाद 2002 में भी वे इसी सीट से जीतकर
विधायक बने।
उनका राजनीतिक सफर केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने 1996 में हरदोई संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव में भी BSP के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उस बार जीत हासिल नहीं हुई। 2009 में उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) के टिकट पर मिश्रिख लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस तरह के अनुभवों से उनकी राजनीतिक समझ और रणनीति और परिपक्व हुई। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़कर 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में गोपामऊ सीट से जीत हासिल की। इस प्रकार वे लगातार तीन बार विधायक बनते रहे हैं—यह उनके क्षेत्रीय जनविश्वास और राजनीतिक पकड़ का स्पष्ट संकेत है।

विधायकी और जनसमस्या समाधान
विधायक के रूप में श्याम प्रकाश ने गोपामऊ के विकास और जनहित के
मुद्दों को सदन और क्षेत्र दोनों स्तरों पर उठाया है। उन्होंने ग्रामीण संपर्क
मार्गों, जल आपूर्ति, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाओं व शिक्षा के विस्तार पर निरंतर जोर दिया है। उनका
मानना रहा है कि क्षेत्र की बुनियादी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देकर ही व्यापक
सामाजिक और आर्थिक विकास हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने अपने कार्यकाल में कई विकास कार्यों को आंदोलन और प्रशासनिक संवाद के माध्यम से आगे बढ़ाया। सड़क, पुल-पुलिया, बहुउद्देशीय जल योजनाएँ और स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन जैसे मुद्दे उनके एजेंडे पर महत्वपूर्ण रहे हैं। उनका दृष्टिकोण यह रहा है कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का अर्थ केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता की रोज-मर्रा की समस्याओं का समाधान करना है।

संसदीय भूमिका और बेबाक बयानों की पहचान
श्याम प्रकाश का राजनीतिक व्यक्तित्व उनके बेबाक बयानों के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने कई मौकों पर न केवल विपक्ष के खिलाफ, बल्कि अपनी ही पार्टी और सरकार की नीतियों पर भी स्पष्ट टिप्पणी की है। उदाहरण के लिए, उन्होंने उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के भ्रष्टाचार विरोधी वादों पर तंज करते हुए कहा था कि अगर वादा सच में पूरा होता तो “99 प्रतिशत अधिकारी जेल चले जाते”, जिससे प्रशासनिक भ्रष्टाचार की व्यापकता पर सवाल उठे।
इसके अलावा कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन संकट से संबद्ध सरकारी आंकड़ों पर उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने सरकारी दावों को चुनौती दी। इस तरह के बयानों ने उन्हें मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में चर्चा-का विषय बनाया। कई बार उनके बयान विवादों का कारण भी बने हैं, जिसमें कई बार उनका वार्तालाप सीधे जनता के बीच चर्चा में रहा है — कभी विकास की गति पर सवाल उठाते हुए, तो कभी अधिकारियों की जवाबदेही पर टिप्पणी करते हुए। इस तरह की अभिव्यक्ति शैली ने उन्हें एक अलग राजनीति-परिचय दिया है।

समाज और राजनीतिज्ञ के रूप में छवि
श्याम प्रकाश की राजनीतिक छवि एक अनुभवी, स्पष्ट-वक्ता और जनता-समस्याओं से गहराई से जुड़ा
नेता के रूप में स्थापित हुई है। उनके
कार्य ने यह दर्शाया है कि वे केवल विधानसभा की राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक प्रश्नों और प्रशासनिक जवाबदेही पर
खुलकर बोलते हैं।
उनकी उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि राजनीति में अनुभव, व्यवहारिक ज्ञान और निरंतर संवाद जनता के समर्थन को प्राप्त कर सकता है। वे गोपामऊ विधानसभा क्षेत्र के विकास, सामाजिक कल्याण और स्थानीय समस्याओं को हल करने की दिशा में सक्रिय रहे हैं।

निष्कर्ष
श्री श्याम प्रकाश का राजनीतिक जीवन
ग्रामीण पृष्ठभूमि से विधानसभा तक का एक प्रेरणादायक सफर है। उनके व्यक्तित्व में
जनसेवा की भावना, जनता से संवाद,
संगठनात्मक अनुभव और विवादास्पद बयानों की बहुआयामी छवि देखने को
मिलती है।
हरदोई के गोपामऊ विधानसभा क्षेत्र में लगातार तीन बार विधायक बनना इस
बात का संकेत है कि जनता ने उनके प्रयासों और नेतृत्व को स्वीकारा है। विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर उनका काम
क्षेत्र के लिए सार्थक रहा है।
कुल मिलाकर, श्याम प्रकाश एक ऐसे
राजनेता हैं जिनकी पहचान न केवल विधान सभा की राजनीति से जुड़ी है, बल्कि उनकी स्पष्ट अभिव्यक्ति, विवादात्मक
टिप्पणियाँ और जनता-समस्याओं के समाधान के लिए सक्रियता ने उन्हें उत्तर प्रदेश की
राजनीति में एक जुझारू और प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित किया है।
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