नाम- देवेंद्र प्रताप सिंह
पद- विधायक (समाजवादी पार्टी),सरेनी (रायबरेली),उत्तर प्रदेश

देवेंद्र प्रताप सिंह: सरेनी के अग्रणी राजनेता — एक समर्पित सार्वजनिक सेवक की कहानी
रायबरेली, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सरेनी विधानसभा क्षेत्र के समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह का नाम अनुभवी, जनता-केंद्रित और लंबे समय से सक्रिय राजनेताओं में शुमार है। धारदार राजनीतिक छाप, लोककल्याण के लिये समर्पण और क्षेत्र की जनता के बीच अपनी पकड़ बनाने की कला ने उन्हें न केवल सरेनी में बल्कि पूरे रायबरेली जिले में एक लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित किया है।

प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
देवेंद्र प्रताप सिंह का जन्म 2 मई 1958 को उत्तर प्रदेश के खजूरगांव में हुआ था। उनके पिता स्वयंबर सिंह एक प्रभावशाली सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े व्यक्ति रहे, जिन्होंने उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को प्रारंभ से ही आकार दिया। परिजनों के बीच उन्हें समाज सेवा और जनहित के मुद्दों के प्रति जागरूकता मिली, जिसने बाद में उनके राजनैतिक जीवन को दिशा दी।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने अच्छी उपलब्धि हासिल की और स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई पूर्ण की। शिक्षा प्राप्ति के दौरान ही उन्होंने सामाजिक और सामुदायिक कामों में सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर पहचान मिली और युवा वर्ग में उनका क्रियाशील नाम बने।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत
देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत 1990 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद (UP Legislative Council) के सदस्य के रूप में की। यह राजनीतिक शुरुआत उनके लिये निर्णायक साबित हुई क्योंकि उन्हें विधान मंडल में शामिल होने का अवसर मिला और राज्य के शासन-प्रशासन की कामकाज को गहराई से समझने का मौका मिला।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस दौरान उन्होंने समाज के विभिन्न तबकों के बीच संवाद स्थापित करना सीखा और स्थानीय समस्याओं पर स्थायी समाधान खोजने की दिशा में काम किया। यह समय उनके लिये प्रशिक्षण की तरह साबित हुआ, जिसने बाद में उनके विधानसभा चुनाव अभियानों में सहायता की।

विधानसभा चुनाव: पहली जीत और अनुभव
वर्ष 2002 में देवेंद्र प्रताप सिंह ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर सरेनी विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक (MLA) के रूप में जीत दर्ज की। यह विजय उनके राजनीतिक करियर का पहला बड़ा मील का पत्थर था। जनता ने उन्हें भरोसा दिया और उन्होंने सरेनी के मुद्दों को विधानसभा तक पहुँचाने का प्रयास किया।
उनकी पहली जीत ने उन्हें स्थानीय जनसमस्याओं जैसे कृषि, रोजगार, सड़क-पानी-बिजली जैसी बुनियादी समस्याओं पर काम करने का अवसर दिया, जहाँ उन्होंने क्षेत्रीय सुधारों पर जोर दिया। हालांकि 2007 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस हार से सीख लेकर उन्होंने फिर से खुद को तैयार किया और 2012 के चुनाव में एक प्रभावशाली वापसी की।

राजनीतिक वापसी और उभार
वर्ष 2012 में सरेनी विधानसभा चुनाव में उन्होंने निर्णायक जीत हासिल की और पुनः विधायक बने। इस जीत को राजनीतिक विश्लेषकों ने उनके लगातार सक्रियता और जनहित एजेंडों के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा। इस अवधी में उन्होंने दल-लोक लेखा समिति जैसी विधायी संस्थाओं में अपनी भूमिका निभाई और विधानसभा के कारीगरी कार्यों में भाग लिया।
उनकी यह दूसरी बार की विधानसभा सदस्यता उन्हें राज्य की राजनीति में एक स्थापित हस्ती के रूप में स्थापित कर गई। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कों के निर्माण जैसे बुनियादी मुद्दों पर विशेष जोर दिया, जिससे स्थानीय जनता के बीच उनका लोक-पसंद नेता के रूप में सम्मान बढ़ा।

2017 का कठिन पड़ाव
उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक परिदृश्य बदला और भाजपा की व्यापक लहर के बीच देवेंद्र प्रताप सिंह चौथे स्थान पर रहे। यह चुनाव उनके लिये कठिन चुनौती साबित हुआ क्योंकि जनमानस में ताजा राजनीतिक भावनाओं ने उनकी जीत को रोका। हालांकि यह संघर्ष था, लेकिन उन्होंने हार से सीख लेकर फिर से खुद को तैयार किया।
तीसरी बार विजय — 2022 का सफर
वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में देवेंद्र प्रताप सिंह ने फिर से चुनाव लड़ा और सरेनी विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक के रूप में जीत हासिल की। इस बार उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी धीरेंद्र बहादुर सिंह को लगभग 3,807 वोटों के अंतर से हराया — जो दिखाता है कि जनता ने उनके अनुभव और क्षेत्रीय कार्यों पर भरोसा जारी रखा।
इस चुनाव में उनके द्वारा उठाये गये मुद्दों में कृषि, स्थानीय रोजगार, सड़क व जलापूर्ति की समस्याओं को प्राथमिकता मिली। जनता के बीच उनकी नीतिगत समझ, अनुभवी नेतृत्व और क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान खोजने की प्रतिबद्धता ने उन्हें विजय दिलाई।

समाज में प्रभाव और योगदान
देवेंद्र प्रताप सिंह का राजनीतिक प्रभाव केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रहा — उन्होंने स्थानीय प्रशासन और जनता के बीच संवाद का पुल बनाया है। उन्होंने सरेनी में गांव-स्तरीय विकास योजनाओं, जन स्वास्थ्य अभियान, शिक्षा और रोजगार केन्द्रित कार्यक्रमों का समर्थन किया। जनता उनसे अपने मुद्दों को सीधे विधानसभा तक पहुँचाने की उम्मीद रखती है।
उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा हिस्सा इस बात से जुड़ा है कि उन्होंने अपने निर्वाचित समय में पारदर्शिता, जनता-मुखी नीतियों और स्थानीय समस्या समाधान पर जोर दिया है। क्षेत्र के किसान, युवा और महिलाएँ उनके कदमों को समर्थन देती हैं क्योंकि उन्होंने लगातार स्थानीय मतदान केंद्रों पर संवाद और बैठकें आयोजित की।

राजनीतिक पहचान और भविष्य
देश-राजनीति में बदलाव की लहरों के बीच भी सरेनी की जनता ने अपने अनुभव और कार्य-प्रणाली वाले प्रतिनिधि को चुना है। देवेंद्र प्रताप सिंह की राजनीतिक पहचान अब केवल एक विधायक के रूप में नहीं, बल्कि उस नेता के रूप में बन चुकी है जो जनता की वास्तविक समस्याओं को विधानसभा और प्रशासन तक आवाज़ देता है।
भविष्य में उनके राजनीतिक कदम, क्षेत्रीय विकास योजनाएँ और सामाजिक न्याय पर आधारित नीतियाँ जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की दिशा में कार्यरत रहने की संभावना है — जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनके नेतृत्व की छाप लंबे समय तक सरेनी में कायम रहेगी।
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