Ad
Search by Term. Or Use the code. Met a coordinator today? Confirm the Identity by badge# number here, look for Navpravartak Verified Badge tag on profile.
सर्च करें या कोड का इस्तेमाल करें, क्या आज हमारे कोऑर्डिनेटर से मिले? पहचान के लिए बैज नंबर डालें और Navpravartak Verified Badge का निशान देखें.
 Search
 Code
Searching...loading

Search Results, page {{ header.searchresult.page }} of (About {{ header.searchresult.count }} Results) Remove Filter - {{ header.searchentitytype }}

Oops! Lost, aren't we?

We can not find what you are looking for. Please check below recommendations. or Go to Home

जल दिवस विशेष - है अंधेरी रात, पर दीवा जलाना कब मनाना है

Arun Tiwari

Arun Tiwari Opinions & Updates

ByArun Tiwari Arun Tiwari   {{descmodel.currdesc.readstats }}

Originally Posted by {{descmodel.currdesc.parent.user.name || descmodel.currdesc.parent.user.first_name + ' ' + descmodel.currdesc.parent.user.last_name}} {{ descmodel.currdesc.parent.user.totalreps | number}}   {{ descmodel.currdesc.parent.last_modified|date:'dd/MM/yyyy h:mma' }}

करोड़ों हिंदुस्तानियों की तरह नाना ने भी सूखे का संत्रास
देखा; आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवार वा

करोड़ों हिंदुस्तानियों की तरह नाना ने भी सूखे का संत्रास देखा; आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवार वालों के दर्द भरे साक्षात्कार सुने। मैनें भी सुने। मेरी हमदर्दी कलम तक सीमित रही, किंतु नाना ने कहा कि टेलीविजन पर देखे दृश्यों से उनका दम घुटने लगा; उनकी नींद उङ गई। उन्होंने सोचा कि  

''जो किसान कभी राजा थे, उनके पास आज न अपने मवेशी के लिए चारा-पानी है और न अपने लिए। मैं जो कर सकता हूं, वह तो करूं।''

जो मुट्ठी भर धन नाना के पास था, उसे लिया और मकरन्द के कहने पर 15-15 हजार रुपये करके 250 विधवाओं में बांट आये।

लेकिन नाना इससे संतुष्ट नहीं हुए; सोचा कि यह उपाय नहीं है। असली उपाय है कि पानी के खो गये स्त्रोत को ढूंढ निकालो और उसे जिंदा कर दो। लोगों को साथ जोङकर खुद श्रम करो; पसीना बहाओ। महसूस करो कि कैसे कोई किसान तपती धूप और सख्त मिट्टी से जूझकर हमारे लिए अन्न पैदा करता है। नाना ने इसके लिए 'नाम फाउण्डेशन' बनाया।

'नाम' यानी भारतीय सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर और मकरन्द अनस्पर द्वारा महाराष्ट्र की सूखा मुक्ति के लिए लिया एक संकल्प। परदे पर अक्सर अन्याय के खिलाफ भूमिकाओं में दिखने वाले नाना पाटेकर ने एक टी वी चैनल को दिए एक साक्षात्कार में कहा –

Ad

''मुझे मरते दम तक जीने का एक रास्ता मिल गया है। यह मैं अपने लिए कर रहा हूं; अपने भीतर के इंसान को जिंदा रखने के लिए।''

फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार भी नाना के इस संकल्प से जुङकर खुश हुए। अभिनेता आमिर खान भी 'पानी फाउण्डेशन' बनाकर लोगों को सूखे के संकट से उबारने में लगे।

महाराष्ट्र, भारत में उद्योग, कृषि, सिंचाई, जल प्रबंधन और जल-अनुशासन के बीच संतुलन के अभाव और उसके दुष्प्रभाव का सबसे अनुभवी उदाहरण है। महाराष्ट्र, इस बात का भी उदाहरण है कि उचित नियोजन, क्रियान्वयन की लोक-धुन और जलोपयोग का अनुशासन न हो, तो बड़े से बड़ा बजट भी जल-स्वावलम्बन सुनिश्चित नहीं कर सकता।

इसी अनुभव का कसौटी को सामने रखते हुए नाना पाटेकर और आमिर खान ने तीन वर्ष पूर्व कुछ प्रेरक पहल की। महाराष्ट्र सरकार ने भी जल साक्षरता बढ़ाने की दृष्टि से 'जल शिवार योजना' पर काम किया। महाराष्ट्र सरकार ने 200 फीट से अधिक गहरे बोरवैलों पर पाबंदी भी लगाई। किंतु जलोपयोग का अनुशासन आज भी महाराष्ट्र के खेत और उद्योगों से कोसों दूर है। नतीजा? इस वर्ष फरवरी से ही पानी के टैंकर दौड़ लगा रहे हैं। जाहिर है कि ज़रूरत कहीं ज्यादा संजीदगी और संकल्प की है। अतः जलोपयोग के नज़रिए से हम हर दिन को जल दिवस मानें।

Ad

इस वर्ष कर्नाटक ने पहले बाढ़ का कुफल भुगता; अब सूखे का भुगत रहा है। कर्नाटक के 176 में से 156 तालुके अभी ही सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं। अकेले रबी के इस मौसम में 11,384.70 करोड़ रुपये की फसली नुकसान का अनुमान पेश किया गया है। कर्नाटक की राज्य सरकार, केन्द्र सरकार से राहत राशि मांग रही है। गांव की सरकारें (ग्रामसभा), ग्राम पंचायत विकास योजना की राशि का उपयोग, गांव की जल योजना बनाने और उसे क्रियान्वयन करने में करें।

बिहार, बाढ़-सुखाड़ का सबसे अनुभवी राज्य है। अपने अनुभव की सीख भूला यह राज्य आज भूजल-गिरावट के स्तर को लेकर परेशान है। लघु सिंचाई विभाग परेशान है कि भू-जल स्तर कैसे उठे? उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब.... आप किसी भी प्रदेश में चले जाइए; भूजल के मामले में भारत तेजी से कंगाल होते राष्ट्र में बदलता जा रहा है। पानी में प्रदूषण का प्रतिशत साल-दर-साल बढ़ ही रहा है। कारण? समाज ने यह मान लिया है कि पानी का इंतज़ाम करना, सरकार का काम है; वही करे। इस चित्र को उलटना होगा।

याद कीजिए वर्ष 2016 जब चंपारण की बुनियादी पाठशालाओं ने जल सत्याग्रह का आगाज किया। लातूर के लोगों ने हौंसला खोने की बजाय खुद 12 करोङ रुपये जमा किए और खुद ही माजरा नदी के पुनर्जीवन का काम शुरु कर दिया। 'आगा खां ट्रस्ट फॉर कल्चर' ने हैदराबाद के कुतुबशाही मकबरे का पुनरोद्धार किया। इस पुनरोद्धार का नतीजा यह हुआ कि चार मई को हुई एक बारिश में यहां की बङी बावङी में एक लाख लीटर और हमाम में 80 हजार लीटर पानी एकत्र हो गया। घुवारा ब्लॉक के बमनौराकलां गांव के पहाड़ पर एक फीट गहरी, डेढ़ किलोमीटर लंबी दस नालियां बना दी थी। बारिश हुई, तो बारिश का सब पानी चांदिया तालाब में समा गया। परिणाम यह है कि कहीं और सूखा हो तो हो, घुवारा के हर नल... हर बोरवैल में पानी है।

इस सीख से सीखे भगवानसिंह परमार की पहल पर बुंदेलखण्ड के जिला छतरपुर में सौ हेक्टेयर के खौंप तालाब पर श्रमदान का जमावङा देख नगरपालिका शरमाई और साझा हुई। उत्तर प्रदेश पुलिस के अपर महानिदेशक महेन्द्र मोदी ने बुंदेलखण्ड के नौ गावों को गोद लेकर जल संरक्षण को एक अभियान का रूप दे डाला। इधर ब्लॉक पलेरा, जिला-टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश) के गांव-छरी और टौरी का संकल्प जागा। करीब 200 ग्रामीणों ने कमर कसी, कुदालें थामी और अपनी मेहनत के दम पर सांधनी नदी पर 150 फीट लंबा, 15 फीट चौड़ा और पांच फीट गहरा स्टॉप डैम बांध दिया। सरकारी इंजीनियर ने देखा तो कहा कि आपने 30 लाख रुपये का काम कर दिखाया है।

Ad

जिला मेरठ के गांव करनावल के किसान सतीश ने अपनी 25 बीघा जमीन पर तालाब बना डाला। मुजफ्फरनगर की तहसील शामली में नदी पर काम शुरु हुआ। जिला-प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश) में समाजशेखर प्रेरक सिद्ध हुए। ग्राम पंचायत को आगे कर नदी बकुलाही के पुनरोद्धार के काम को रफ्तार देनी शुरु कर दी। आर्यशेखर प्रेरित हुए, तो उन्होने पानी के व्यावसायीकरण के खिलाफ प्याऊ को औजार बनाना तय किया। गंगा प्याऊ की श्रृंखला ही शुरु कर दी। बिहार शासन ने सरकारी बैठकों में बोतलबंद पानी पर रोक का आदेश जारी कर दिया। उत्तर प्रदेश शासन ने बुंदेलखण्ड में निजी भूमि पर 2000 खेत-तालाबों को मंजूरी व मदद दोनो की घोषणा कर डाली। कई पहल हुईं।

जलपुरुष राजेन्द्र सिंह, सच्चिदानन्द भारती, संत बलवीर सिंह सीचेवाल समेत अनेक शख्सियतों के नेतृत्व से हुईं ज़मीनी पहलों से हम परिचित हैं हीं। कहना न होगा कि पानी, हम सभी पीते हैं। अतः संजोने की ज़िम्मेदारी भी हम में से प्रत्येक की है। हम सभी जुटें। अपनी भूमिका तय करें और उसे निभायें।

कवि स्व. हरिवंश राय बच्चन के शब्दों में सभी की सीख एक ही है - ''है अंधेरी रात, पर दीवा जलाना कब मना है...'' भूलें नहीं कि दुष्प्रभाव की इस अधिकता का असल कारक मानव खुद है। अतः प्रकृति को दोष देना बेकार है। समाधान स्वयं हम मानवों को ही खोजने होंगे। संकट साझा है, तो समाधान भी साझे से ही निकलेगा। जिनके बीच सहज साझा संभव नहीं होता, संकट में उनके बीच भी साझे की संभावना बन जाती है। आइये, यह संभावना बनाये। जो खुद कर सकते हों, हम करें।

चुनाव का मौसम है। पार्टिंयां चुनावों की तैयारी करती हैं। पार्टियां ही उम्मीदवार तय करती हैं। पांच साल वे क्या करेंगी; इसका घोषणापत्र भी पार्टियां ही बनाती हैं। इस बार हम पार्टी नहीं, प्रतिनिधि चुनें। पार्टी-घोषणापत्र की जगह, पब्लिक-घोषणापत्र बनायें। मसलन, वोटर, अपने-अपने इलाके का का जन-घोषणापत्र (पब्लिक मेनिफेस्टो) बनायें और लोकसभा उम्मीदवारों से उसे लागू कराने का शपथपत्र लें। किंतु यह न भूलें कि बारिश आती है, तो वह किसी की प्रतीक्षा नहीं करती। हम भी न करें।

इस वर्ष भारत में मानसून आगमन के प्रथम चरण यानी जून में अच्छी बारिश की संभावना व्यक्त की जा रही है। मानसून आने से पूर्व हम अपने-अपने इलाके की जल संरचनाओं, मेङबंदियों को दुरुस्त कर लें; शहरी अपने परिसरों का पानी संजोने का इंतजाम शुरु कर दें; ताकि बारिश आये, तो धरती का पेट खाली न रह जाये। देश के अनेक संगठन और पानी कार्यकर्ता पहले भी यह अपील करते रहें हैं। इस वर्ष की अपील भी यही है और सीख भी यही। आइए, यह करें।

Attached Images

Related Videos
Related Audio
Leave a comment for the team.
Subscribe to this research.
रिसर्च को सब्सक्राइब करें

Join us on the latest researches that matter.

इस रिसर्च पर अपडेट पाने के लिए और इससे जुड़ने के लिए अपना ईमेल आईडी नीचे भरें.

Responses

{{ survey.name }}@{{ survey.senton }}
{{ survey.message }}
Reply

How It Works

ये कैसे कार्य करता है ?

start a research
Follow & Join.

With more and more following, the research starts attracting best of the coordinators and experts.

start a research
Build a Team

Coordinators build a team with experts to pick up the execution. Start building a plan.

start a research
Fix the issue.

The team works transparently and systematically fixing the issue, building the leaders of tomorrow.

start a research
जुड़ें और फॉलो करें

ज्यादा से ज्यादा जुड़े लोग, प्रतिभाशाली समन्वयकों एवं विशेषज्ञों को आकर्षित करेंगे , इस मुद्दे को एक पकड़ मिलेगी और तेज़ी से आगे बढ़ने में मदद ।

start a research
संगठित हों

हमारे समन्वयक अपने साथ विशेषज्ञों को ले कर एक कार्य समूह का गठन करेंगे, और एक योज़नाबद्ध तरीके से काम करना सुरु करेंगे

start a research
समाधान पायें

कार्य समूह पारदर्शिता एवं कुशलता के साथ समाधान की ओर क़दम बढ़ाएगा, साथ में ही समाज में से ही कुछ भविष्य के अधिनायकों को उभरने में सहायता करेगा।

How can you make a difference?

Do you care about this issue? Do You think a concrete action should be taken?Then Follow and Support this Research Action Group.Following will not only keep you updated on the latest, help voicing your opinions, and inspire our Coordinators & Experts. But will get you priority on our study tours, events, seminars, panels, courses and a lot more on the subject and beyond.

आप कैसे एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं ?

क्या आप इस या इसी जैसे दूसरे मुद्दे से जुड़े हुए हैं, या प्रभावित हैं? क्या आपको लगता है इसपर कुछ कारगर कदम उठाने चाहिए ?तो नीचे फॉलो का बटन दबा कर समर्थन व्यक्त करें।इससे हम आपको समय पर अपडेट कर पाएंगे, और आपके विचार जान पाएंगे। ज्यादा से ज्यादा लोगों द्वारा फॉलो होने पर इस मुद्दे पर कार्यरत विशेषज्ञों एवं समन्वयकों का ना सिर्फ़ मनोबल बढ़ेगा, बल्कि हम आपको, अपने समय समय पर होने वाले शोध यात्राएं, सर्वे, सेमिनार्स, कार्यक्रम, तथा विषय एक्सपर्ट्स कोर्स इत्यादि में सम्मिलित कर पाएंगे।
Communities and Nations where citizens spend time exploring and nurturing their culture, processes, civil liberties and responsibilities. Have a well-researched voice on issues of systemic importance, are the one which flourish to become beacon of light for the world.
समाज एवं राष्ट्र, जहाँ लोग कुछ समय अपनी संस्कृति, सभ्यता, अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने एवं सँवारने में लगाते हैं। एक सोची समझी, जानी बूझी आवाज़ और समझ रखते हैं। वही देश संसार में विशिष्टता और प्रभुत्व स्थापित कर पाते हैं।
Share it across your social networks.
अपने सोशल नेटवर्क पर शेयर करें

Every small step counts, share it across your friends and networks. You never know, the issue you care about, might find a champion.

हर छोटा बड़ा कदम मायने रखता है, अपने दोस्तों और जानकारों से ये मुद्दा साझा करें , क्या पता उन्ही में से कोई इस विषय का विशेषज्ञ निकल जाए।

Got few hours a week to do public good ?

Join the Research Action Group as a member or expert, work with right team and get funded. To know more contact a Coordinator with a little bit of details on your expertise and experiences.

क्या आपके पास कुछ समय सामजिक कार्य के लिए होता है ?

इस एक्शन ग्रुप के सहभागी बनें, एक सदस्य, विशेषज्ञ या समन्वयक की तरह जुड़ें । अधिक जानकारी के लिए समन्वयक से संपर्क करें और अपने बारे में बताएं।

Know someone who can help?
क्या आप किसी को जानते हैं, जो इस विषय पर कार्यरत हैं ?
Invite by emails.
ईमेल से आमंत्रित करें
The researches on ballotboxindia are available under restrictive Creative commons. If you have any comments or want to cite the work please drop a note to letters at ballotboxindia dot com.

Code# 5{{ descmodel.currdesc.id }}

ज़ारी शोध जिनमे आप एक भूमिका निभा सकते है. Live Action Researches that might need your help.